भाग २: मुख्य पाठ (कहानी का एक-एक शब्द)
बाज़ार में उस दिन बहुत भीड़ थी और जोर की बारिश हो रही थी। पिताजी ने तीन मछलियाँ खरीदी थीं। मछलियाँ झोले में थीं और लेखक (संतू) तथा उसका छोटा भाई झोले को दोनों हाथों से पकड़कर तेज़ बारिश में दौड़ते हुए घर की तरफ भाग रहे थे। झोले के अंदर तीनों मछलियाँ तड़प रही थीं, जिससे पूरा झोला हिल रहा था। मूसलाधार बारिश के कारण वे दोनों पूरी तरह भीग चुके थे, लेकिन उन्हें मछलियों के मरने का बड़ा डर था।
घर पहुँचकर उन्होंने सबसे पहले मछलियों को कमरे में फर्श पर एक बड़ी बाल्टी में डाल दिया। बाल्टी पानी से पूरी भरी हुई थी। लेखक और उसका भाई सहमे हुए उन मछलियों को देख रहे थे। झोले में से बाल्टी में जाते ही तीनों मछलियाँ थोड़ी स्थिर हो गईं। संतू और उसका भाई बाल्टी के ऊपर झुककर देख रहे थे कि वे साँस ले रही हैं या नहीं। संतू ने एक मछली को छूने की कोशिश की, तो वह तड़पकर उछल पड़ी, जिससेसंतू डरकर पीछे हट गया।
"लेखक विनोद कुमार शुक्ल ने दिखाया है कि कैसे एक मध्यमवर्गीय परिवार में बच्चों की मासूमियत (संतू का मछली को पालने का सपना) बड़ों की रूढ़ियों और गुस्से के आगे दब जाती है। पिता का मछली के लिए गुस्सा और संतू का उस मछली को बचाने के लिए कुएं में डालने का प्रयास, समाज के इस गहरे विरोधाभास और संवेदनहीनता पर बहुत ही कड़क और करारा तंज कसता है।"
तभी लेखक के दिमाग में एक कड़क विचार आया। उसने अपने भाई से कहा कि "चलो, हम दीदी से पूछते हैं कि क्या इन मछलियों को कुएं में डाला जा सकता है?" दीदी को मछलियाँ बहुत पसंद थीं। लेकिन माँ मछलियों को घर में पसंद नहीं करती थी। संतू ने दीदी से पूछा, तो दीदी ने कहा कि "नहीं, मछलियाँ बाल्टी में ही ठीक हैं, कुएं में वे मर जाएँगी।" लेकिन संतू और उसका भाई दीदी की बात पर भरोसा नहीं कर पाए। संतू चाहता था कि वह कम से कम एक मछली को तो बचा ही ले और उसे कुएं में डाल दे ताकि वह हमेशा उसके पास रहे।
इसके कुछ देर बाद जब माँ रसोई में चली गई, तो पिताजी ने संतू और उसके भाई को डांट लगाई कि वे मछलियों के पास क्यों खड़े हैं। पिताजी का गुस्सा बहुत तेज़ था। संतू और उसका भाई डरकर कमरे से बाहर आ गए। शाम को जब मछलियाँ काटने का समय हुआ, तो पिताजी ने अपने नौकर भग्गू को बुलाया। भग्गू ने मछलियों को काटने की तैयारी शुरू कर दी। यह देखकर संतू के मासूम दिल को बहुत धक्का लगा। वह एक मछली को उठाकर रसोई के पीछे की तरफ दौड़ा और उसे कुएं में डाल दिया। यह देखकर पिताजी बहुत गुस्सा हुए और उन्होंने संतू और भग्गू को बहुत डांटा। संतू का मछली को पालने का वह मासूम सपना पिताजी के गुस्से और मध्यमवर्गीय रूढ़ियों के आगे पूरी तरह टूट गया।