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बिहार बोर्ड कक्षा 10वीं हिंदी | गोधूलि भाग 2

अध्याय 10: मछली

लेखक: विनोद कुमार शुक्ल
न्यू स्टैंडअलोन डिजिटल संस्करण

भाग १: लेखक परिचय

जन्म तिथि एक जनवरी उन्नीस सौ सैंतीस (1 जनवरी 1937 ई०)
जन्म स्थान राजनंदगाँव, छत्तीसगढ़
मुख्य पहचान समकालीन हिंदी कविता और कथा-साहित्य के बेजोड़ जादुई कथाकार
राष्ट्रीय सम्मान साहित्य अकादमी पुरस्कार, रघुवीर सहाय स्मृति पुरस्कार, दयावती मोदी कवि शेखर सम्मान

हिंदी के प्रसिद्ध और विलक्षण कवि-कथाकार विनोद कुमार शुक्ल का जन्म १ जनवरी उन्नीस सौ सैंतीस (1937 ई०) में छत्तीसगढ़ के राजनंदगाँव नामक स्थान पर हुआ था। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा कृषि विज्ञान में हासिल की थी। वे जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय में प्राध्यापक रहे और बाद में वे निराला सृजनपीठ के अध्यक्ष भी रहे। शुक्ल जी की लेखन शैली समकालीन हिंदी साहित्य में एक बिल्कुल नया और अनूठा 'जादुई यथार्थवाद' प्रस्तुत करती है, जहाँ वे साधारण मध्यमवर्गीय जीवन की छोटी-छोटी घटनाओं को भी बहुत ही मार्मिक और कौतूहलपूर्ण तरीके से पेश करते हैं।

उनकी प्रमुख कृतियों में: वह आदमी नया गरम कोट पहनकर चला गया विचार की तरह, सब कुछ होना बचा रहेगा, अतिरिक्त नहीं जैसे बेजोड़ काव्य-संग्रह; तथा नौकर की कमीज, खिलेगा तो देखेंगे, दीवार में एक खिड़की रहती थी जैसे विश्वविख्यात उपन्यास शामिल हैं। उन्हें 'दीवार में एक खिड़की रहती थी' उपन्यास पर साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ था।

प्रस्तुत कहानी 'मछली' उनके विख्यात कहानी-संग्रह 'महाविद्यालय' से ली गई है। यह कहानी एक सीधे-साधे छोटे बच्चे के नज़रिए से लिखी गई है, जो अपने पिता द्वारा बाज़ार से खरीदी गई मछलियों और अपने परिवार के सदस्यों के व्यवहार को बहुत ही मासूमियत से देखता है। इस कहानी के माध्यम से लेखक ने मध्यमवर्गीय परिवार की छोटी-छोटी खुशियों, डर, रूढ़ियों और इंसानी संवेदनाओं को बहुत ही सजीवता से चित्रित किया है। बिहार बोर्ड कक्षा 10वीं के छात्रों को यह पाठ गहरी जीवन दृष्टि और करुणा का भाव सिखाने में अत्यंत कड़क और मददगार है।

कथाकार विनोद कुमार शुक्ल
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भाग २: मुख्य पाठ (कहानी का एक-एक शब्द)

बाज़ार में उस दिन बहुत भीड़ थी और जोर की बारिश हो रही थी। पिताजी ने तीन मछलियाँ खरीदी थीं। मछलियाँ झोले में थीं और लेखक (संतू) तथा उसका छोटा भाई झोले को दोनों हाथों से पकड़कर तेज़ बारिश में दौड़ते हुए घर की तरफ भाग रहे थे। झोले के अंदर तीनों मछलियाँ तड़प रही थीं, जिससे पूरा झोला हिल रहा था। मूसलाधार बारिश के कारण वे दोनों पूरी तरह भीग चुके थे, लेकिन उन्हें मछलियों के मरने का बड़ा डर था।

घर पहुँचकर उन्होंने सबसे पहले मछलियों को कमरे में फर्श पर एक बड़ी बाल्टी में डाल दिया। बाल्टी पानी से पूरी भरी हुई थी। लेखक और उसका भाई सहमे हुए उन मछलियों को देख रहे थे। झोले में से बाल्टी में जाते ही तीनों मछलियाँ थोड़ी स्थिर हो गईं। संतू और उसका भाई बाल्टी के ऊपर झुककर देख रहे थे कि वे साँस ले रही हैं या नहीं। संतू ने एक मछली को छूने की कोशिश की, तो वह तड़पकर उछल पड़ी, जिससेसंतू डरकर पीछे हट गया।

💡 लेखक का संदेश (संतू की मासूमियत बनाम पिता का गुस्सा)

"लेखक विनोद कुमार शुक्ल ने दिखाया है कि कैसे एक मध्यमवर्गीय परिवार में बच्चों की मासूमियत (संतू का मछली को पालने का सपना) बड़ों की रूढ़ियों और गुस्से के आगे दब जाती है। पिता का मछली के लिए गुस्सा और संतू का उस मछली को बचाने के लिए कुएं में डालने का प्रयास, समाज के इस गहरे विरोधाभास और संवेदनहीनता पर बहुत ही कड़क और करारा तंज कसता है।"

तभी लेखक के दिमाग में एक कड़क विचार आया। उसने अपने भाई से कहा कि "चलो, हम दीदी से पूछते हैं कि क्या इन मछलियों को कुएं में डाला जा सकता है?" दीदी को मछलियाँ बहुत पसंद थीं। लेकिन माँ मछलियों को घर में पसंद नहीं करती थी। संतू ने दीदी से पूछा, तो दीदी ने कहा कि "नहीं, मछलियाँ बाल्टी में ही ठीक हैं, कुएं में वे मर जाएँगी।" लेकिन संतू और उसका भाई दीदी की बात पर भरोसा नहीं कर पाए। संतू चाहता था कि वह कम से कम एक मछली को तो बचा ही ले और उसे कुएं में डाल दे ताकि वह हमेशा उसके पास रहे।

इसके कुछ देर बाद जब माँ रसोई में चली गई, तो पिताजी ने संतू और उसके भाई को डांट लगाई कि वे मछलियों के पास क्यों खड़े हैं। पिताजी का गुस्सा बहुत तेज़ था। संतू और उसका भाई डरकर कमरे से बाहर आ गए। शाम को जब मछलियाँ काटने का समय हुआ, तो पिताजी ने अपने नौकर भग्गू को बुलाया। भग्गू ने मछलियों को काटने की तैयारी शुरू कर दी। यह देखकर संतू के मासूम दिल को बहुत धक्का लगा। वह एक मछली को उठाकर रसोई के पीछे की तरफ दौड़ा और उसे कुएं में डाल दिया। यह देखकर पिताजी बहुत गुस्सा हुए और उन्होंने संतू और भग्गू को बहुत डांटा। संतू का मछली को पालने का वह मासूम सपना पिताजी के गुस्से और मध्यमवर्गीय रूढ़ियों के आगे पूरी तरह टूट गया।

भाग ३: पाठ के अंत के प्रश्न-उत्तर (Bihar Board Exam Exercises)

💡 प्रत्येक प्रश्न के नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करके बिहार बोर्ड परीक्षा मानक के अनुकूल उत्तर प्राप्त करें और उनका निरंतर अभ्यास करें।

विशेषज्ञ उत्तर (BSEB बोर्ड परीक्षा मानक)

बाज़ार से घर आते समय तेज़ बारिश हो रही थी। झोले के अंदर तीनों मछलियाँ तड़प रही थीं, जिससे पूरा झोला हिल रहा था। संतू और उसके भाई को यह डर लग रहा था कि बारिश में भीगने और झोले में घुटन होने के कारण मछलियाँ कहीं रास्ते में ही न मर जाएँ।

विशेषज्ञ उत्तर (BSEB बोर्ड परीक्षा मानक)

संतू ने जब बाल्टी में एक मछली को छूने की कोशिश की, तो वह मछली अचानक तड़पकर उछल पड़ी। इस आकस्मिक हरकत से संतू सहम गया और डरकर पीछे हट गया। उसे लग रहा था कि मछली उसे काट लेगी या वह मर जाएगी।

विशेषज्ञ उत्तर (BSEB बोर्ड परीक्षा मानक)

संतू उस मछली को पालना चाहता था। उसे लग रहा था कि कुएं में डालकर वह हमेशा उसके पास रहेगी। वह एक मछली को कुएं में डाल भी देता है, लेकिन इस प्रयास का परिणाम यह होता है कि पिताजी बहुत गुस्सा होते हैं और उसे बहुत डांट पड़ती है।

विशेषज्ञ उत्तर (BSEB बोर्ड परीक्षा मानक)

इस कहानी के माध्यम से लेखक ने मध्यमवर्गीय परिवार की उन रूढ़ियों पर व्यंग्य किया है जहाँ बच्चों की मासूम इच्छाओं और संवेदनाओं (मछली को पालने का सपना) को बड़ों के गुस्से और सामाजिक रूढ़ियों (मछली को काटने की परंपरा) के आगे कुचल दिया जाता है।

भाग ४: शब्दार्थ (कठिन शब्दों के अर्थ)

मूसलाधार बहुत तेज़ और मूसल की तरह गिरने वाली बारिश।
सहमा डरा हुआ, सहम गया या भयभीत स्थिति।
जादुई यथार्थवाद साधारण जीवन में छिपे हुए जादुई और विलक्षण तत्व।
तड़पन तड़प या व्याकुलता की स्थिति, मछलियों का तड़पना।
प्रतीत महसूस होना, लगना या आभास होना।
कौतूहल जानने की तीव्र इच्छा, उत्सुकता या आश्चर्य।