भाग २: मुख्य पाठ (भाषण का एक-एक शब्द)
सर्वविध संपदा और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण कौन-सा देश है, यदि मुझसे कोई पूछे तो मैं उंगली भारत की तरफ ही उठाऊँगा। भारत वह देश है जहाँ मानव-मस्तिष्क की उत्कृष्टतम उपलब्धियों का सबसे पहली बार साक्षात्कार हुआ है, जहाँ जीवन की सबसे बड़ी समस्याओं पर विचार करके ऐसे समाधान ढूँढे गए हैं जो यूरोप के विचारकों के लिए भी अध्ययन का विषय हैं। यदि आप भूविज्ञान में रुचि रखते हैं, यदि आप वनस्पति जगत में खो जाना चाहते हैं, या यदि आप जीवों के विकास का अध्ययन करना चाहते हैं, तो भारत आपके लिए एक ऐसी खुली प्रयोगशाला है जहाँ कदम-कदम पर आपको नई जानकारियाँ मिलेंगी।
जर्मनी के महान विद्वान मैक्समूलर नए अंग्रेज अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहते हैं कि यदि आप लोगों को 'सच्चे भारत' के दर्शन करने हैं, तो आपको कलकत्ता, बंबई या मद्रास जैसे बड़े शहरों की चकाचौंध को छोड़कर भारत के गाँवों की तरफ रुख करना होगा। असली भारतीय आत्मा, उसका सच्चा व्यवहार, उसकी सरलता और उसकी प्राचीन संस्कृति आज भी भारत के गाँवों में ही सुरक्षित है। शहरों में तो केवल यूरोप की नकली नकल दिखाई देती है, लेकिन असली भारत की धड़कन उसके ग्रामीण अंचलों में ही बसती है।
"मैक्समूलर का मानना था कि भारत के इतिहास और उसकी आत्मा को समझने के लिए शहरों के दफ्तर नहीं, बल्कि गाँवों की चौपालें देखनी होंगी। हमारा इतिहास, धर्म, और भाईचारा आज भी भारत के गाँवों में उसी पवित्र रूप में जिंदा है जैसा हजारों साल पहले था।"
मैक्समूलर इतिहास का एक बहुत ही शानदार उदाहरण देते हुए कहते हैं कि जब वारेन हेस्टिंग्स भारत का गवर्नर जनरल था, तो उसे वाराणसी (बनारस) के पास एक घड़े में भरे हुए 'दारिस' नाम के एक सौ बहत्तर (172) सोने के प्राचीन सिक्के मिले थे। वारेन हेस्टिंग्स ने सोचा कि ईस्ट इंडिया कंपनी के मालिक इस अनमोल ऐतिहासिक खजाने को देखकर बहुत खुश होंगे और उसकी तारीफ करेंगे, इसलिए उसने वह घड़ा लंदन भेज दिया। लेकिन कंपनी के निदेशकों ने उन सिक्कों के ऐतिहासिक महत्व को समझे बिना, उन्हें साधारण सोना समझकर गला दिया। जब वारेन हेस्टिंग्स वापस इंग्लैंड लौटा तो उसे इस बात का गहरा अफसोस हुआ। मैक्समूलर अंग्रेजों को चेतावनी देते हुए कहते हैं कि भारत आकर ऐसी नादानी मत दोहराना, यहाँ का एक-एक पत्थर और पुरानी लिपियाँ इतिहास का अनमोल खजाना हैं।
भारत की संस्कृत भाषा की तारीफ करते हुए लेखक कहते हैं कि संस्कृत दुनिया की सबसे पुरानी और वैज्ञानिक भाषा है। ग्रीक, लैटिन और जर्मन भाषाओं की जड़ें भी संस्कृत से ही जुड़ी हुई हैं। चाहे कानून की बात हो, धर्म की बात हो या दर्शन की—यदि आपको मानव सभ्यता के उद्गम को समझना है, तो आपको संस्कृत का अध्ययन करना ही पड़ेगा। भारत ने पूरे विश्व को पंचतंत्र की कहानियों के माध्यम से नीतिशास्त्र सिखाया। अंत में लेखक कहते हैं कि जो युवा अधिकारी भारत जा रहे हैं, उन्हें निराश होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, क्योंकि सर विलियम जोन्स की तरह उनके लिए भी भारत में सीखने और खोजने के लिए असीमित अवसर मौजूद हैं।