भाग २: मुख्य पाठ (यात्रा-वृत्तांत का एक-एक शब्द)
आविन्यों दक्षिण फ्रांस का एक पुराना और ऐतिहासिक शहर है। यह रोन नदी के किनारे बसा हुआ है। पुराने समय में यह कुछ दिनों तक ईसाइयों के पोप की राजधानी भी रहा था। अब यह शहर हर वर्ष गर्मियों में होने वाले एक बहुत बड़े अंतर्राष्ट्रीय थियेटर और कला महोत्सव के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। इस उत्सव के दौरान पूरे शहर की पुरानी इमारतें, गलियाँ और चर्च रंगमंच में बदल जाते हैं और दुनिया भर के नामचीन कलाकार वहाँ अपनी कला का प्रदर्शन करने आते हैं।
लेखक अशोक वाजपेयी बताते हैं कि उन्हें पीटर ब्रुक का एक विख्यात और विवादस्पद नाटक 'महाभारत' देखने के लिए आविन्यों आने का न्योता मिला था। वे वहाँ कुल उन्नीस दिन रहे—चौबीस अक्टूबर से दस नवंबर उन्नीस सौ चौरानवे तक। इस प्रवास के लिए उन्होंने आविन्यों के पास ही रोन नदी के दूसरी तरफ बसे एक बेहद पुराने ईसाई मठ 'ला शत्रूज़' को अपना ठिकाना बनाया। यह मठ चौदहवीं सदी में 'कार्तूसियन संप्रदाय' के संतों द्वारा बनवाया गया था, जो बाद में क्रांति के समय सरकारी संपत्ति बन गया था। अब उसे एक बेहद खूबसूरत सांस्कृतिक केंद्र (विला न्येव ले आविन्यों) में बदल दिया गया है, जहाँ दुनिया भर के लेखक और संगीतकार एकांत में रहकर अपनी साधना करते हैं।
"अशोक वाजपेयी जी का मानना है कि जैसे रोन नदी सदियों से अविरल बह रही है और उसमें पानी कभी खत्म नहीं होता, ठीक उसी प्रकार मनुष्य के भीतर की रचनात्मक कविता और कला भी हमेशा बहती रहती है। नदी के किनारे बैठना नदी के साथ बहने जैसा है। एकांत में प्रकृति और कला मिलकर मनुष्य की आत्मा को और अधिक कड़क और सुंदर बना देती हैं।"
लेखक अपने इस उन्नीस दिनों के एकांत जीवन की दिनचर्या के बारे में बताते हुए कहते हैं कि वे अपने साथ भारी-भरकम सामान नहीं, बल्कि केवल हिंदी का एक टाइपराइटर, तीन-चार कड़क पुस्तकें और कुछ संगीत के कैसेट लेकर गए थे। वहाँ का माहौल इतना शांत और पवित्र था कि वे सुबह से रात तक केवल लेखन कार्य में डूबे रहते थे। इस अद्भुत एकांत और सृजनशीलता का परिणाम यह हुआ कि उन्होंने मात्र उन्नीस दिनों के भीतर पैंतीस (35) कविताएँ और सत्ताईस (27) कड़क गद्य रचनाएँ लिख डालीं। वे कहते हैं कि इतनी तेजी से और इतनी मात्रा में उन्होंने अपने जीवन में पहले कभी नहीं लिखा था।
यात्रा-वृत्तांत के अंत में लेखक आविन्यों शहर और ला शत्रूज़ मठ के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता प्रकट करते हैं। वे कहते हैं कि हर सुंदर और ऐतिहासिक शहर हमें अपनी यादों की ज़ंजीर में बांध लेता है। आविन्यों केवल पत्थरों का एक पुराना शहर नहीं है, बल्कि वह मानवीय कला, इतिहास और शांति का एक ऐसा जीवंत केंद्र है जो सरहदों को भूलकर पूरी दुनिया के दिलों को आपस में जोड़ता है। यह पाठ हमें अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने और उनका आदर करने की एक बहुत ही कड़क और दूरगामी शिक्षा देता है।