📝 महत्वपूर्ण लेखक परिचय (परीक्षा के लिए विशेष)
- लेखक का नाम: ईश्वर पेटलीकर।
- भाषा एवं विधा: यह गुजराती साहित्य की एक अत्यंत लोकप्रिय, भावुक और यथार्थवादी कहानी है।
- मुख्य उपन्यास: इनका प्रसिद्ध उपन्यास **'खून की सगाई'** (लोही नी सगाई) पूरे गुजरात में अमर रचना मानी जाती है।
- हिंदी अनुवादक: इस गुजराती कहानी का हिंदी में सफल अनुवाद गोपालदास मिश्र जी ने किया है।
- लेखन शैली: ईश्वर पेटलीकर ने गुजराती समाज के भीतरी रीति-रिवाजों और माँ की ममता का बहुत ही मार्मिक वर्णन किया है।
📌 कहानी के मुख्य बिंदु (VIP टॉपिक्स)
- मुख्य पात्रा (मंगू): मंगू एक १२ वर्ष की जन्मजात पागल और गूंगी लड़की है, जिसे उसकी माँ पागलों की तरह बेपनाह प्यार करती है।
- माँ की ममता: मंगू के अलावा माँ के तीन और संतानें हैं (दो बेटे और एक बेटी कमू), लेकिन माँ का पूरा जीवन केवल मंगू की सेवा में ही बीतता है। लोग उन्हें अस्पताल भेजने की सलाह देते हैं पर वे मना कर देती हैं।
- कुसुम का प्रसंग: गाँव की एक अन्य लड़की कुसुम अचानक पागल हो जाती है, पर अस्पताल में कड़े इलाज के बाद वह ठीक होकर लौटती है। उसे देखकर माँ का मन भी मंगू को अस्पताल भेजने के लिए मान जाता है।
- मार्मिक अंत: बड़े बेटे के साथ जब माँ मंगू को कड़क दिल करके अस्पताल छोड़ आती हैं, तो घर लौटते ही मंगू के वियोग में **माँ स्वयं भी पागलों की तरह चिल्लाने लगती हैं** और मंगू की श्रेणी में शामिल हो जाती हैं।
🎯 बोर्ड परीक्षा टिप: 'माँ' की ममता की पराकाष्ठा और भीतरी मानसिक वेदना को दर्शाने वाला यह पाठ परीक्षाओं में सबसे ज्यादा भावुक प्रश्न पैदा करता है।
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बिहार बोर्ड परीक्षा अभ्यास टेस्ट
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